Physical hearing in supreme court सुप्रीम कोर्ट में एक्सपेरिमेंट के तौर पर होगी फिजिकल सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट प्रयोग के तौर पर सीमित संख्या में मामलों की फिजिकल सुनवाई शुरू करेगा। इसके लिए दिशानिर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। ...



नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट प्रयोग के तौर पर सीमित संख्या में मामलों की फिजिकल सुनवाई शुरू करेगा। इसके लिए दिशानिर्देश भी जारी कर दिए गए हैं, लेकिन सुनवाई शुरू करने की तारीख नहीं बताई गई है। फिजिकल सुनवाई से मतलब यह है कि न्यायाधीश और वकील दोनों अदालत आएंगे और कोर्ट रूम में आमने-सामने मामलों की सुनवाई होगी। कोरोना महामारी के चलते राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बाद 25 मार्च से सुप्रीम कोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मामलों की सुनवाई हो रही है। लॉकडाउन में रियायत के बाद भी अभी यही व्यवस्था चली आ रही है।

कई बार संगठनों की अपील पर इस महीने के शुरू में जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय कमेटी ने प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे से प्रयोग के तौर पर अतिरिक्त सावधानी के साथ फिजिकल सुनवाई शुरू करने की सिफारिश की थी। हालांकि, कई वकीलों ने कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए फिजिकल सुनवाई शुरू करने का विरोध भी किया है।

सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल संजीव एस. कलगांवकर ने फिजिकल सुनवाई के लिए दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। लेकिन इसमें यह नहीं बताया गया कि किस तारीख से फिजिकल सुनवाई शुरू होगी। उन्होंने कहा है कि तीन कोर्ट रूम में सीमित मामलों की फिजिकल सुनवाई शुरू हो सकती है। बाद में हालात को देखते हुए कोर्ट रूम के साथ ही मामलों की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है।

सुनवाई के दौरान शारीरिक दूरे के मानकों का पालन किया जाएगा। जिन मामलों की सुनवाई होगी, उन्हीं के वकीलों और मुवक्किलों को कोर्ट में जाने की अनुमति होगी। अगर किसी मामले में ज्यादा पक्षकार होंगे तो हर पक्ष एक वकील (एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड) और विपक्ष के एक वकील को प्रवेश दिया जाएगा। हर पक्ष के वकील के लिए एक क्लर्क को भी अदालत में जाने की अनुमति होगी। हर मामले के हिसाब से उसके वकील और पक्षकार को अदालत में जाने के लिए प्रतिदिन पास जारी किए जाएंगे। हर कोर्ट रूम में आने-जाने के लिए अगल-अलग गेट होंगे।
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