सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों की मंजूरी(Gift of the increased salary seventh pay commission approved)बढ़े वेतन की सौगात, - UP Government Shasanadesh (GO) : शासनादेश उत्तरप्रदेश,Government Order, UPGO
  • Latest Government Order

    बुधवार, 29 जून 2016

    सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों की मंजूरी(Gift of the increased salary seventh pay commission approved)बढ़े वेतन की सौगात,

    आखिरकार सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों की मंजूरी का जो इंतजार हो रहा था वह पूरा हुआ। इससे करीब 47 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 53 लाख पेंशनधारकों को खुश होना चाहिए, लेकिन यह अजीब है कि
    कर्मचारियों के कुछ संगठन न केवल नाराजगी प्रकट कर रहे हैं, बल्कि हड़ताल पर जाने की चेतावनी भी दे रहे हैं। इस रवैये से आम लोगों के लिए यह समझना मुश्किल होगा कि आखिर जब केंद्रीय कर्मचारियों के मूल वेतन में 2.5 गुना वृद्धि हो रही है, न्यूनतम वेतन सात हजार रुपये से बढ़कर 18 हजार होने जा रहा है और अधिकतम वेतन 90000 रुपये से बढ़कर 2.56 लाख रुपये हो जाएगा तब फिर नाराजगी जताने का क्या मतलब? विडंबना यह है कि ऐसा हमेशा होता है।

     ऐसा लगता है कि कुछ काम परिपाटी सी बन गए हैं। यह संभव है कि वेतन आयोग की सिफारिशों से संबंधित कुछ प्रावधान ऐसे हों जिन पर कर्मचारियों के विरोध का कोई औचित्य बनता हो, लेकिन जब एक समिति को शिकायत सुनने और विसंगतियों की छानबीन करने का जिम्मा सौंप दिया गया है तब फिर हड़ताल के रास्ते पर जाने का क्या मतलब? बेहतर हो कि नाराज कर्मचारी संगठन सरकार से बातचीत के जरिये समस्या सुलझाने की राह पकड़ें। यह ठीक नहीं कि जब आम लोगों को यह संदेश जा रहा हो कि केंद्रीय कर्मचारियों को बढ़े हुए वेतन का तोहफा मिला तब वे धरना-प्रदर्शन की बातें करें। यह उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार को केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन-भत्ताें संबंधी मसलों को सही तरह से सुलझाने में मदद मिलेगी और यह काम जल्द ही हो जाएगा।

    हालांकि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से सरकारी खजाने पर करीब 1.02 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा, लेकिन इसका एक पहलू यह भी है कि केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन बढ़ने से अर्थव्यवस्था में करीब एक लाख करोड़ रुपये आने का अनुमान है। यह एक बड़ी राशि है। 

    इससे उपभोक्ता मांग बढ़ेगी और उसका लाभ जीडीपी वृद्धि में दिखना चाहिए। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशन धारकों के रूप में एक करोड़ लोगों की क्रय क्षमता में वृद्धि होने के सकारात्मक नतीजे अर्थव्यवस्था को हासिल होंगे, इसके संकेत गत दिवस रियल एस्टेट, ऑटो और सीमेंट कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने से भी मिले। यह भी एक शुभ संकेत है कि ज्यादातर विशेषज्ञ यह मान रहे हैं कि वेतन वृद्धि के नतीजे में महंगाई बढ़ने के वैसे कोई आसार नहीं हैं जैसे अतीत में दिखते रहे।

     केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बने वेतन आयोग की सिफारिशों की मंजूरी के बाद यह लगभग तय है कि राज्यों के कर्मचारी भी ऐसी ही मांग करेंगे। राज्य सरकारों को देर-सबेर उनकी मांग को पूरा करना ही होगा। समय के साथ वेतन वृद्धि एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन प्रशासनिक सुधार भी समय की मांग हैं। 

    आम तौर पर वेतन आयोग प्रशासनिक सुधार की आवश्यकता रेखांकित करते हैं, लेकिन उनकी पूर्ति मुश्किल से ही होती है। इन स्थितियों में यह जरूरी है कि प्रशासनिक तंत्र में सुधार के लिए ठोस उपाय किए जाएं। यह समझना कठिन है जब हर तरह के सुधारों पर चर्चा हो रही है तब फिर प्रशासनिक सुधार केंद्र और साथ ही राज्य सरकारों के एजेंडे पर क्यों नहीं आ पा रहे हैं? जिस तरह एक निश्चित अंतराल पर वेतन आयोग आवश्यक हैं उसी तरह प्रशासनिक सुधार आयोग भी।