यूपीपीजीएमईई : निजी कॉलेज होंगे दूर चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय ने शासन को भेजा प्रस्ताव निजी कॉलेजों से पढ़े विद्यार्थियों को न मिले सरकारी में मौका हो रही तैयारी, - UP Government Shasanadesh (GO) : शासनादेश उत्तरप्रदेश,Government Order, UPGO
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    शुक्रवार, 18 मार्च 2016

    यूपीपीजीएमईई : निजी कॉलेज होंगे दूर चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय ने शासन को भेजा प्रस्ताव निजी कॉलेजों से पढ़े विद्यार्थियों को न मिले सरकारी में मौका हो रही तैयारी,

    डॉ. संजीव, लखनऊ प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों की परास्नातक कक्षाओं में प्रवेश के लिए होने वाली परीक्षा यूपीपीजीएमईई से निजी मेडिकल कॉलेजों को दूर करने की तैयारी है। चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय ने शासन को इस बाबत प्रस्ताव भेजा है।

    प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के एमडी, एमएस या परास्नातक डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए कुल 751 व एमडीएस की 27 सीटें हैं। इनमें से आधी सीटें अखिल भारतीय कोटे से भरी जाती हैं और आधी सीटें उत्तर प्रदेश से एमबीबीएस करने वालों के लिए बचती हैं।

    इनमें भी बीते दो वर्षो से 30 फीसद आरक्षण पीएमएस संवर्ग के अभ्यर्थियों के लिए कर दिया गया है। चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय ने शासन को भेजी अपनी संस्तुति में प्रदेश के अभ्यर्थियों के लिए बहुत कम सीटें बचने का मुद्दा उठाते हुए निजी कॉलेजों से एमबीबीएस या बीडीएस करने वालों को पीजीएमईई में बैठने की अनुमति न देने की बात कही है।

    इस बाबत चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ.वीएन त्रिपाठी द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है कि जब निजी कॉलेजों को पीजीएमईई के माध्यम से प्रवेश का फैसला हुआ था तब कॉलेज भी कम थे और उनके यहां परास्नातक पाठ्यक्रम भी नहीं थे।

    इस समय निजी क्षेत्र में एमबीबीएस की 2300 व बीडीएस की 2300 सीटें हैं। इसी तरह परास्नातक स्तर पर एमडी, एमएस व डिप्लोमा की 509 व एमडीएस की 611 सीटें हैं।

    सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों की एक भी सीट पीजीएमईई का हिस्सा नहीं है, इसलिए उनके विद्यार्थियों को इस परीक्षा में नहीं बैठने देना चाहिए। प्रमुख सचिव (चिकित्सा शिक्षा) डॉ. अनूपचंद्र पांडेय ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के आलोक में निदेशालय की संस्तुतियों के अनुरूप शासन स्तर पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

    👉वे तो नहीं देते प्रवेश :

    इस समय प्रदेश में निजी क्षेत्र में 21 मेडिकल व 23 डेंटल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इनमें 11 मेडिकल व 21 डेंटल कॉलेजों में परास्नातक पाठ्यक्रम संचालित हैं।1निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में स्नातक या परास्नातक कक्षाओं में यूपीसीपीएमटी या यूपीपीजीएमईई के माध्यम से प्रवेश नहीं मिलता है।

    शासन ने 2006 में अधिसूचना जारी कर निजी मेडिकल व डेंटल कालेजों में स्टेट कोटा का निर्धारण किया गया था, पर प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों ने न्यायालय से स्थगनादेश प्राप्त कर लिया और सभी सीटें वे स्वयं भरते हैं।

    👉विधानसभा में उठा था मुद्दा :

    विधानसभा बजट सत्र में भाजपा विधायक डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल ने कहा था कि बाहर से आकर डोनेशन देकर निजी मेडिकल कॉलेजों के छात्र-छात्रएं तो यूपीपीजीएमईई में बैठ सकते हैं किन्तु प्रदेश में जन्मे और राष्ट्रीय परीक्षाओं में अच्छी रैंक लेकर देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेकर एमबीबीएस करने वाले इसमें नहीं बैठ सकते।

    यही नहीं बीएचयू व एएमयू से संबद्ध मेडिकल कॉलेजों के छात्र-छात्रएं भी इसमें नहीं बैठ सकते। मांग हुई थी कि प्रदेश के मूल निवासी छात्र-छात्रओं को यूपीपीजीएमईई में छूट मिलनी चाहिए।