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    शनिवार, 12 मार्च 2016

    अब सुप्रीम कोर्ट में तय होगा आपकी पहचान का 'आधार'

    सचिन यादव,दिल्ली, भले ही केंद्र सरकार ने आधार बिल को लोकसभा में वित्त विधेयक के रूप में पास करवा लिया हो। पर इसकी असल अग्निपरीक्षा अभी सुप्रीम कोर्ट में होनी बाकी है।

    आधार कार्ड की अनिवार्यता को लेकर सरकार अभी भी सुप्रीम कोर्ट में लड़ रही है। सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद ही यह तय हो पाएगा कि आधार कार्ड का वजूद क्या है। पढ़िए खास रिपोर्ट जिसमें आधार कार्ड के भूत से भविष्य तक की विस्तृत पड़ताल की गई है।

    आधार योजना को संवैधानिक रूप देने के लिए केंद्र सरकार ने 11 मार्च, 2016 को लोकसभा में वित्त विधेयक के रूप में आधार बिल को पास करवा लिया। सरकार का मानना है कि इस बॉयोमेट्रिक आधारित योजना के चलते केंद्र की तरफ चल रही सामाजिक योजनाओं के साथ-साथ पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस देने की सुविधा को आसान बनाया जा सकेगा।

    सरकार ने जल्द से जल्द स्कीम को व्यापक रूप में लागू करने के लिए वित्त विधेयक का सहारा लिया। क्योंकि अगर आधार बिल ऐसे ही राज्यसभा में पारित होने के लिए जाता तो वहां विपक्ष का बहुमत होने के कारण इसे पारित करवाने में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता।

    वोटिंग के समय यह बिल गिर जाता। इस बिल में संशोधन के लिए कांग्रेस के सांसद राजीव सातव और बीजेडी के सांसद तथागत सतपथी ने प्रस्ताव पेश किया। पर उनके इस प्रस्ताव को ध्वनिमत से गिरा दिया गया। जब बिल लोकसभा में पास हुआ तब सदन में मात्र 73 सांसद मौजूद थे और कुल सांसदों की संख्या 545 है।

    आधार बिल के वित्त विधेयक के रूप में पास हो जाने के बाद वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा "पूरे देश में 99 करोड़ लोगों ने आधार में अपना नामांकन करवा रखा है। देश के करीब 97 फीसदी लोगों के पास आधार कार्ड है। वहीं करीब 67 फीसदी बच्चों का भी पंजीकरण है।

    आधार कार्ड के जरिए पहले ही एलपीजी सब्सिडी में 15,000 करोड़ रुपए की बचत की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में चार राज्यों दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पुडुच्चेरी में आधार कार्ड के जरिए 2,346 करोड़ रुपए को बचाया जा सका है।

    वहीं विपक्ष आधार कार्ड के जरिए लोगों की खुफिया निगरानी किए जाने के मुद्दे को उठा रहा है। विपक्ष का आधार कार्ड को लेकर डर है कि लोगों का बहुत अधिक संख्या में डाटा इस समय बाजार में है।

    सरकार को इस बात को सुनिश्चित करना चाहिए कि लोगों की बॉयोमेट्रिक पहचान को बांटा नहीं जाएगा। साथ ही आधार कार्ड को पहचान के रूप में कितनी जगह प्रयोग किया जाएगा, इस बात को भी साफ करना चाहिए।