स्वास्थ्य महकमे में संविदा भर्ती में घपला,सामान्य सीट पर चयनित किये गए ओबीसी अभ्यर्थी, आरक्षण नियम ताक पर, - UP Government Shasanadesh (GO) : शासनादेश उत्तरप्रदेश,Government Order, UPGO
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    गुरुवार, 24 मार्च 2016

    स्वास्थ्य महकमे में संविदा भर्ती में घपला,सामान्य सीट पर चयनित किये गए ओबीसी अभ्यर्थी, आरक्षण नियम ताक पर,

    ब्यूरो इलाहाबाद, कौशाम्बी के स्वास्थ्य महकमे में संविदा कर्मियों की नियुक्ति में भारी घपला किया गया। कई पद रिक्त होने के बावजूद मात्र उतने ही पदों (पांच से कम) पर भर्तियों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए, जितनी संख्या पर आरक्षण व्यवस्था लागू नहीं होती है।

    छह पद रिक्त होने के बावजूद लैब अटेंडेंट के तीन पदों पर मनमाने तरीके से नियुक्तियां की गईं। नतीजा कि तीनों पदों पर किसी सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी की भर्ती नहीं हुई। दो पदों पर जाति विशेष (ओबीसी) के अभ्यर्थियों और तीसरे पद पर एससी अभ्यर्थी को नौकरी मिली।

    इससे आवेदकों में खासा आक्रोश हैं और उन्होंने भर्ती में बड़े पैमाने पर घपला किए जाने का आरोप लगाया है।

    अफसर भी मान रहे हैं कि ऊपर से दबाव था, सो समझौता करना पड़ा।कौशाम्बी के संयुक्त जिला चिकित्सालय में लैब अटेंडेंट के दो और ब्लड स्टोरेज सीएचसी सराय अकिल में लैब अटेंडेंट के एक पद पर संविदा पर नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे गए थे।

    कुल तीन पद थे, सो नियमानुसार भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण व्यवस्था लागू नहीं की गई। भर्ती के लिए सिर्फ इंटरव्यू लिए गए और योग्यता को इसका आधार बनाया गया। कौन अभ्यर्थी कितना योग्य है, यह साक्षात्कार कमेटी को तय करना था।

    कमेटी में सीएमओ, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट एवं एक अन्य स्थानीय अफसर को शामिल किया गया था। इस पर शासन स्तर से कोई निगरानी नहीं थी।

    सब कुछ बंद कमरे में तय होना था। ठीक वैसा हुआ, जैसा अफसर चाहते थे। तीन पदों के लिए 234 लोगों ने आवेदन किए, जिनमें 20 फीसदी अभ्यर्थी सामान्य वर्ग के थे। तीन में से दो पदों पर यादव जाति (ओबीसी वर्ग) और एक पर एससी अभ्यर्थी का चयन कर लिया गया।

    इंटरव्यू के नतीजे सामने आते ही हंगामा शुरू हो गया। अन्य अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाए कि अफसरों ने प्रत्येक पद पर नियुक्ति के लिए पांच-पांच लाख रुपये लिए। आरोप यह भी है कि ओबीसी वर्ग के जिन दो अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई है, दोनों के लिए सत्तारूढ़ दल के एक स्थानीय पदाधिकारी ने दबाव बनाया था।

    फिलहाल परिणाम सामने आने के बाद विवादों ने जोर पकड़ लिया है और अफसर बचाव का रास्ता ढूंढ रहे हैं। अगर सभी छह रिक्त पदों पर एक साथ भर्तियां होतीं तो कम से कम तीन पद सामान्य वर्ग के खाते में जाते और बाकी ओबीसी एवं एससी अभ्यर्थियों में बंट जाते। हालांकि सामान्य वर्ग में ओबीसी और एससी का चयन हो सकता है मगर यह तभी हो सकता है जब उनकी योग्यता सामान्य से अधिक हो।

    अगर इंटरव्यू कमेटी ऐसा करती तो कई जगह सफाई देनी पड़ती और खुद को सही साबित करना कमेटी के लिए बड़ी चुनौती होती, सो अफसरों ने आसान रास्ता ढूंढा। सूत्रों का कहना है कि ऐसा जानबूझकर किया गया ताकि दो बार तीन-तीन पदों पर अलग-अलग भर्तियां की जाएं और इसकी आड़ में मोटी कमाई की जा सके।

    कौशाम्बी के स्वास्थ्य महकमे में संविदा पर स्टाफ नर्स की नियुक्ति भी की गई। इसके लिए भी इंटरव्यू लिए गए और इसमें भी खेल हुआ। कौशाम्बी के सपा जिलाध्यक्ष अशोक यादव के चचेरे भाई अजय यादव पुत्र मानसिंह यादव की भी स्टाफ नर्स के पद पर नियुक्ति हुई। खास यह कि स्टाफ नर्स की नियुक्ति दो श्रेणियों में की गई।

    एसएनसीयू श्रेणी में आठ पदों पर नियुक्ति की गई, जिनमें चार पद सामान्य वर्ग के थे और दो-दो पद ओबीसी एवं एससी के लिए आरक्षित थे। इसके अलावा एनबीएसयू श्रेणी में तीन पदों के लिए आवेदन मांगे गए, सो नियमत: इस पद पर नियुक्ति के लिए आरक्षण व्यवस्था लागू नहीं की गई। सपा जिलाध्यक्ष के चचेरे भाई अजय यादव का चयन एनबीएसयू श्रेणी में स्टाफ नर्स के तौर पर किया गया।

    ‘सभी छह पदों पर भर्ती के लिए शासन के पास प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन तीन पदों पर ही नियुक्ति के लिए स्वीकृति मिली। जहां तक तीनों पदों पर ओबीसी और एससी अभ्यर्थियों के चयन का सवाल है तो इसके लिए ऊपर से दबाव था। इसके बावजूद प्रयास यही किया गया कि भर्ती में पारदर्शिता बनी रहे।’ डॉ. यूबी सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी कौशाम्बी

    ‘इस बारे में कौशाम्बी के डीएम से बात की जाएगी। अगर भर्ती में गड़बड़ी की शिकायत आ रही है तो इस पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।’ राजन शुक्ला, कमिश्नर

    हाईकोर्ट के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना है कि हाईकोर्ट की फुलबेंच का फैसला है कि जहां पांच से कम पद होंगे, वहां आरक्षण लागू नहीं होगा। अनारक्षित पदों पर किसी भी वर्ग को नियुक्ति दी सकती है बशर्ते वह पद की अर्हता रखता हो और चयनित लोग सभी आवेदकों में सर्वाधिक योग्यता रखते हों।

    सरकार ने अगर जानबूझकर अधियाचन के सभी पद स्वीकृत नहीं किए हैं और सिर्फ उतने ही पद स्वीकृत किए हैं जिन पर आरक्षण लागू नहीं होता है तो व्यथित व्यक्ति शासन को एक प्रत्यावेदन भेजकर अपनी शिकायत कर सकता है। यदि इससे भी कुछ नहीं होता है तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर राहत की मांग की जा सकती है।