कोर्ट का अहम फैसला, विशेष आरक्षित कोटे का सामान्य में चयन रद्द - shasanadesh - up shasanadesh, up govt, up government, cm of up, up official website, salary, pension
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    गुरुवार, 17 मार्च 2016

    कोर्ट का अहम फैसला, विशेष आरक्षित कोटे का सामान्य में चयन रद्द

    ब्यूरो, इलाहाबाद नागरिक पुलिस और पीएसी में 4010 सब इंस्पेक्टर तथा प्लाटून कमांडेंट की भर्ती में विशेष आरक्षित वर्ग (महिला, एक्स सर्विस मैन और सेनानी आश्रित) को सामान्य वर्ग की सीटों में नियुक्ति देने का निर्णय रद्द कर दिया गया है।

    कोर्ट ने माना कि विशेष आरक्षित वर्ग को मिलने वाला क्षैतिज आरक्षण का लाभ उस वर्ग विशेष के लिए आरक्षित सीटों में ही दिए जाने का नियम है।

    ऐसा न करके सरकार ने आरक्षण नियमों का उल्लंघन किया है जिससे आरक्षण 50 प्रतिशत से बढ़कर 77 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो असंवैधानिक है।

    अदालत ने गलत आरक्षण लागू करने के लिए प्रत्येक याची के हिसाब से 10 हजार रुपये सरकार पर हर्जाना लगाया है। इस हिसाब से हर्जाने की राशि लगभग दो लाख 80 हजार रुपये हो गई है।

    आशीष कुमार पांडेय और 24 अन्य, प्रमोद कुमार व अन्य तथा मुनेंद्र प्रताप सिंह की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने यह आदेश सुनाया। याचिका पर अधिवक्ता सीमांत सिंह ने बहस की।

    कोर्ट ने निर्देश दिया है कि विशेष आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को श्रेणीवार समायोजित किया जाए। इसका अर्थ है कि यदि विशेष श्रेणी का अभ्यर्थी ओबीसी है तो उसे ओबीसी कोटे के 27 प्रतिशत आरक्षित सीटों में ही चयन दिया जाएगा।

    आरक्षण उस वर्ग की मेरिट में नीचे से लागू किया जाएगा। इससे पूर्व में चयनित किए गए कुछ अभ्यर्थी बाहर हो जाएंगे और विशेष आरक्षित अभ्यर्थी अपने कोटे में स्थान पाएगा।

    अदालत ने प्रमुख सचिव गृह को निर्देश दिया है कि वह हर्जाने की राशि चार सप्ताह के भीतर महानिबंधक कार्यालय में जमा करा दें।

    कोर्ट ने हर्जाने की राशि इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से वसूल करने की सरकार को छूट दी है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि सामान्य, ओबीसी और एससीएससी कोटे में यदि महिलाओं के आरक्षित सीटें अभ्यर्थी न मिलने की वजह से रिक्त रह जाती हैं तो उनको पुरुष अभ्यर्थियों से भरा जाए जबकि एक्स सर्विस मैन और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रितों की सीटें यदि रिक्त रह जाती है तो उनको अगली भर्ती के लिए कैरी फारवर्ड किया जाए।

    उल्लेखनीय है कि 19 मई 2011 को सिविल पुलिस में 3698 सबइंस्पेक्टर और पीएसी में 312 प्लाटून कमांडरों के पद पर भर्ती का विज्ञापन जारी हुआ।

    परिणाम जारी होने पर पता चला कि विशेष आरक्षित वर्ग को उनकी श्रेणियों में नियुक्ति देने के बजाए सामान्य की 50 प्रतिशत सीटों पर नियुक्ति दे दी गई।

    ऐसा करने में 50 प्रतिशत खुले चयन के सिद्धांत का पालन नहीं हुआ। इससे आरक्षित कोटा 50 प्रतिशत के बजाए 77 प्रतिशत पहुंच गया। अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि यह आरक्षण नियमावली और इंदिरा साहनी केस में सुप्रीम के निर्णय का खुला उल्लंघन है।