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    बुधवार, 20 जनवरी 2016

    उच्च शिक्षा : स्नातक कोर्स में भी लागू करें सेमेस्टर प्रणाली शिक्षकों के खाली पदों को भरने के लिए एक हफ्ते में विज्ञापन प्रकाशित करने का निर्देश

    राज्य ब्यूरो, लखनऊ : शासन ने राज्य विश्वविद्यालयों को स्नातकोत्तर कोर्स के साथ स्नातक पाठ्यक्रमों में भी सेमेस्टर प्रणाली लागू करने का निर्देश दिया है।

    विश्वविद्यालयों से कहा गया है कि वे शिक्षकों के खाली पदों को भरने के लिए एक हफ्ते में विज्ञापन प्रकाशित कर शासन को इसकी जानकारी दें।

    बुधवार को प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा जितेंद्र कुमार की अध्यक्षता में विभाग के अधीन सभी राज्य विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों की बैठक हुई।

    बैठक में प्रमुख सचिव ने कुलसचिवों से कहा कि कई विश्वविद्यालयों ने स्नातकोत्तर स्तर पर तो सेमेस्टर प्रणाली लागू कर दी है लेकिन ज्यादातर विश्वविद्यालयों ने स्नातक स्तर पर इसे लागू नहीं किया है।

    इसलिए विश्वविद्यालय स्नातक पाठ्यक्रमों में भी सेमेस्टर प्रणाली लागू करें। कुलसचिवों को विश्वविद्यालयों की वेबसाइट को अपडेट करने के साथ सभी छात्रों के अंकपत्र स्कैन कर उस पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया ताकि अंकपत्रों के सत्यापन में अनावश्यक विलंब न हो।

    छात्रों को माइग्रेशन सर्टिफिकेट, डिग्रियां आदि की भी इलेक्ट्रॉनिक डिलिवरी की सुविधा मुहैया कराने का निर्देश दिया गया ताकि इन्हें हासिल करने में उन्हें असुविधा न हो। परीक्षा प्रणाली को ऑनलाइन करने के लिए कुलसचिवों को हिदायत दी गई।

    छात्रों की बढ़ती संख्या और कापियां जांचने में अधिक समय लगने के दृष्टिगत बैठक में यह सुझाव भी दिया गया कि प्रश्नपत्रों को इस तरह से तैयार किया जाए ताकि उत्तरपुस्तिकाएं जांचने में कम समय लगे और रिजल्ट समय से घोषित हो सकें।

    विश्वविद्यालयों में ऐसे रोजगारपरक कोर्स संचालित करने के लिए कहा गया जो स्थानीय उद्योगों के लिए उपयोगी और प्रासंगिक हों। स्नातक व स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान दिलाने के लिए उन्हें उद्योगों में दस दिन की इंटर्नशिप और प्रोजेक्ट वर्क कराने के लिए भी कुलसचिवों को ताकीद किया गया।

    शिक्षक सत्र को समय से चालू करने के निर्देश देने के साथ विश्वविद्यालयों की विभिन्न परिषदों की बैठकें नियमित आयोजित कराने के लिए कहा गया।

    बैठक के दौरान कुलसचिवों ने कहा कि अभी शिक्षकों को उत्तरपुस्तिकाएं जांचने के लिए जो पारिश्रमिक दिया जाता है उसकी अधिकतम सीमा 40000 रुपये है। उन्होंने इसे बढ़ाकर 60000 रुपये करने का अनुरोध किया। इस पर प्रमुख सचिव ने कहा कि विश्वविद्यालय यदि इस बारे में प्रस्ताव भेजें तो शासन इस पर विचार करेगा।